मध्य प्रदेशराजनीति

एकेएस यूनिवर्सिटी सरकारी कार्यक्रम का आयोजक क्यों….?
जबाब दे कृषि विभाग – अतुल सिंह

सतना( ननकू यादव ): किसान कल्याण एवं कृषि विभाग द्वारा एकेएस यूनिवर्सिटी में आज किसान विज्ञान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमें जिले के सर्वोत्तम कृषकों को सम्मानित किया गया ! प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस सरकार की यह मंशा है कि प्रदेश में कृषि आय को बढ़ावा देने के लिए किसानों को न केवल प्रोत्साहित किया जाय बल्कि योजनाओं के माध्यम से उन्हें लाभान्वित भी किया जाय ! बेहद हैरानी की बात है कि इस सरकारी आयोजन का आयोजक न केवल एक निजी संस्था को बनाया गया बल्कि उसके परिसर में कार्यक्रम आयोजित करके उस संस्था को महिमामण्डित करने का प्रयास भी किया गया ! किसानों के हित मे चलाई जाने वाली योजनाओं के बेहतर संचालन हेतु शासन द्वारा प्रदेश के हर ज़िलों में कृषक सलाहकार समितियों का गठन किया गया है ! कृषि विभाग द्वारा आयोजित किये गये इस कार्यक्रम के सम्बंध में कृषक सलाहकार समिति के किसी भी सदस्य को न तो विश्वास में लिया गया और न ही उन्हें किसी प्रकार की सूचना दी गई !


जिला कांग्रेस कमेटी सतना के प्रवक्ता
एवं सदस्य जिला कृषक सलाहकार समिति अतुल सिंह परिहार ने इस कार्यक्रम के आयोजन के तरीके को लेकर सीधी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि निजी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया । जिला प्रशासन से भी हमारा सवाल है कि एकेएस यूनिवर्सिटी शासन का ऐसा कौन सा हिस्सा है जिसकी वजह से उसे इस सरकारी कार्यक्रम का आयोजक बनाया गया ! कृषि विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अगर आयोजक एकेएस यूनिवर्सिटी है तो कार्यक्रम का खर्च कृषि विभग उठाएगा या एकेएस यूनिवर्सिटी ? प्रशासन को यह जानकारी होनी चाहिये। उन्होंने यह भी जानकारी देते हुए कहा कि हाल ही में इस यूनिवर्सिटी पर एग्रीकल्चर विषय की फर्जी डिग्री बांटने के आरोप लग चुके हैं ।विगत दिवस बीटेक एग्रीकल्चर की मान्यता को लेकर आक्रोशित छात्रों ने एकेएस यूनिवर्सिटी में जमकर हंगामा किया। इस हंगामाई माहौल को नियंत्रित करने मौके पर पहुंचे यूनिवर्सिटी के चेयरमैन अनंत सोनी ने पहले छात्रों को समझानेे की कोशिश की और जब छात्र ‘बीटेक एग्रीकल्चर की मान्यता’ को लेकर सवाल उठाने लगे, तो उनके साथ अभद्रता करते हुए छीना झपटी भी की गई। जिले के नवागत कलेक्टर से अपेक्षा है कि इस मामले को संज्ञान में लें क्योंकि इस कार्यक्रम में निजी संस्था को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से शासन की मंशाओं पर पानी फेरने की कोशिश की गयी है ! अगर यह कार्यक्रम प्रशासन स्तर पर सार्वजनिक जगह में आयोजित किया जाता और जिले भर के कृषकों को बुलाकर उन्हें सरकार की योजनाओं के बारे में बताया जाता तो न केवल मुख्यमंत्री का संदेश जिले के हर किसान तक पहुंचता बल्कि किसानों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती ।

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