धर्ममध्य प्रदेश

गणेश चतुर्थी पर इस विधि से करें पूजा

ज्योतिषाचार्य निधि राज त्रिपाठी के अनुसार—विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहे जाने वाले भगवान श्री गणेश का जन्मोत्सव 22 अगस्त, शनिवार को देशभर में मनाया जाएगा। इसे विनायक चतुर्थी, कलंक चतुर्थी और डण्डा चतुर्थी आदि जैसे नामों से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है, इसलिए किसी भी शुभ काम को करने से पहले उनकी पूजा की जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से शुरू किया गया काम बिना किसी रुकावट के संपन्न होता है।

ज्योतिषाचार्य निधि राज त्रिपाठी के अनुसार—हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्म हुआ था, इसीलिए इस दिन गणेश चतुर्थी का पर्व मनाते हैं। गणेश चतुर्थी का पर्व दस दिनों तक चलता है, दसवें दिन अनंत चतुर्दशी के साथ इस पर्व की समाप्ति होती है। अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी के विसर्जन के बाद इस दस दिवसीय त्यौहार का अंत होता है। सप्ताह में बुधवार के दिन को गणेश जी की पूजा के लिए खास माना जाता है।

ज्योतिषाचार्य निधि राज त्रिपाठी के अनुसार—-गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त और समय :
गणेश पूजन के लिए मध्याह्न मुहूर्त 11:05:43 से 13:41:30 तक
अवधि 2 घंटे 35 मिनट
समय जब चन्द्र दर्शन नहीं करना है 09:07:00 से 21:25:00 तक

ज्योतिषाचार्य निधि राज त्रिपाठी के अनुसार–विघ्नहर्ता गणेश जी को ज़रूर चढ़ाएं ये चीज़ें
बौद्धिक ज्ञान के देवता कहे जाने वाले गणपति के आशीर्वाद से व्यक्ति का बौद्धिक विकास होता है। इसीलिए भक्त उनका आशीर्वाद पाने के लिए सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से आराधना करते हैं। भक्त गणपति की पूजा करते समय छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हैं, ताकि उनसे कोई गलती ना हो जाएँ। लेकिन अक्सर जानकारी न होने के अभाव में वे भगवान गणेश जी को ये कुछ चीज़ें चढ़ाना भूल जाते हैं। पहला मोदक का भोग और दूसरा दूर्वा (एक प्रकार की घास) और तीसरा घी। ये तीनों ही गणपति को बेहद प्रिय हैं। इसीलिए जो भी व्यक्ति पूरी आस्था से गणपति की पूजा में ये चीज़ें चढ़ाता है तो उस व्यक्ति को गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

क्यों चढ़ाते हैं गणपति को प्रसाद में मोदक?
रिद्धि सिद्धि के देवता गणपति के पूजन में प्रसाद के रूप में खासतौर पर मोदक का भोग ज़रूर लगाया जाता है। कहा जाता है कि मोदक गणपति को बहुत पसंद है। लेकिन इसके पीछे पौराणिक मान्यताएं छिपी हुई हैं। पुराणों के अनुसार गणपति और परशुराम के बीच युद्ध चल रहा था, उस दौरान गणपति का एक दाँत टूट गया।

इसके चलते उन्हें खाने में काफी परेशानी होने लगी। उनके कष्ट को देखते हुए कुछ ऐसे पकवान बनाए गए जिसे खाने में आसानी हो और उससे दाँतों में दर्द भी ना हो। उन्हीं पकवानों में से एक मोदक था। मोदक खाने में काफी मुलायम होता है। माना जाता है कि श्री गणेश को मोदक बहुत पसंद आया था और तभी से वो उनका पसंदीदा मिष्ठान बन गया था। इसलिए भक्त गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए मोदक का भोग लगाने लगे।

हालाँकि मोदक के विषय में कुछ पौराणिक धर्मशास्त्रों में भी जिक्र किया गया है। मोदक का अर्थ होता है – ख़ुशी या आनंद। गणेश जी को खुशहाली और शुभ कार्यों का देव माना गया है इसलिए भी उन्हें मोदक चढ़ाया जाता है।

ज्योतिषाचार्य निधि राज त्रिपाठी के अनुसार—–गणेश चतुर्थी के दिन क्यों निषेध है चंद्र दर्शन ऐसी माना जाता है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए, नहीं तो व्यक्ति के ऊपर मिथ्या कलंक यानि बिना किसी वजह से व्यक्ति पर कोई झूठा आरोप लगता है। पुराणों के अनुसार एक बार भगवान कृष्ण ने भी गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन किया था, जिसकी वजह से उन्हें भी मिथ्या का शिकार होना पड़ा था। गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को लेकर एक और पौराणिक मत है जिसके अनुसार इस चतुर्थी के दिन ही भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया था। इस वजह से ही चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को निषेध माना गया।

ज्योतिषाचार्य निधि राज त्रिपाठी के अनुसार—-गणेश चतुर्थी पर इस विधि से करें पूजा
सबसे पहले सुबह उठकर स्नान आदि करें।
उसके बाद गणेश जी की तांबे या फिर मिट्टी की प्रतिमा लें।
अब एक कलश में जल भर लें और उसके मुँह को नए से वस्त्र बांध दें। इसके बाद उसके ऊपर गणेश जी को विराजमान करें।
गणेश जी को सिंदूर, दूर्वा, घी चढ़ाएं और 21 मोदक का भोग लगाकर विधिवत पूजा करें।
अंत में लडडुओं का प्रसाद ग़रीबों और ब्राह्मणों को बाँट दें।
दस दिनों तक चलने वाले गणेश चतुर्थी के इस त्यौहार पर आप गणेश जी की मूर्ति को एक, तीन, पांच, सात और नौ दिनों के लिए घर पर रख सकते हैं।

ज्योतिषाचार्य निधि राज त्रिपाठी के अनुसार—-राशि अनुसार करें भगवान गणेश को प्रसन्न करने के उपाय
मेष राशि- इस राशि के जातक भगवान गणेश की लाल रंग की प्रतिमा घर में स्थापित कर, उन्हें लाल व सिंदूरी रंग के वस्त्र पहनाएं। पूजा में गणेश जी को गुड़ के लड्डू, अनार, छुआरा, लाल गुलाब और 11 दूर्वा अर्पित करें।

मंत्र – ॐ वक्रतुण्डाय हुं॥

वृषभ राशि- इस राशि के जातक गणेश जी की नीले रंग की प्रतिमा घर में स्थापित कर, उन्हें को श्वेत वस्त्र पहनाएँ। पूजा में मोदक, सफेद रंग के पुष्प, इत्र, मिश्री, शक्कर और नारियल से बने लड्डू चढ़ाएं।

मंत्र – ॐ ह्रीं ग्रीं ह्रीं।

मिथुन राशि- इस राशि वाले जातकों को गणेश जी के हरे रंग की प्रतिमा को घर लाना चाहिए और उन्हें हरे रंग के वस्त्र पहनाना चाहिए। गजानन की पूजा में मूंग के लड्डू, पान, हरी इलायची, दूर्वा, हरे फल और सूखे मेवों का भोग लगाएँ।

मंत्र – ॐ श्रीं गं लक्ष्मी

कर्क राशि- कर्क राशि वाले जातकों को गणेश जी सफ़ेद रंग के गणपति की मूर्ति को घर लाना चाहिए और उन्हें गुलाबी रंग के वस्त्र पहनाएँ। लम्बोदर की पूजा में मोदक, चावल से बनी खीर, मक्खन और गुलाब के फूल गणेश जी को चढ़ाएं।

मंत्र – ॐ एकदंताय हुं॥

सिंह राशि – इस राशि के जातक गणेश जी की सिन्दूरी रंग की मूर्ति स्थापित कर लाल रंग के वस्त्र पहनाएँ। पूजा में गुड़ या गुड़ से बने मिष्ठान, कनेर के फूल, लाल फल और छुआरा अर्पित करें।

मंत्र – ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतेय वरवरदं सर्वजनं में वशमानाय स्वाहा॥

कन्या राशि – कन्या राशि के जातक भगवान गणेश की हरे रंग की प्रतिमा घर में स्थापित कर, उन्हें हरे रंग के वस्त्र पहनाएं। पूजा में उन्हें हरे फल, मूंग की दाल के लड्डू, पान, हरी इलायची, किशमिश, दूर्वा और सूखे मेवों का भोग लगाएँ।

मंत्र – ॐ गं गणपतयै नमः॥ ॐ श्रीं श्रियैः नमः॥

तुला राशि – इस राशि के जातक गणेश जी की नीले और सफ़ेद रंग की मूर्ति स्थापित कर श्वेत वस्त्र पहनाएँ। पूजा में गणपति को लड्डू, केला, सफेद रंग के फूल, इत्र और मिश्री का भोग लगाएँ।

मंत्र – ॐ ह्रीं, ग्रीं, ह्रीं॥

वृश्चिक राशि – वृश्चिक राशि के जातक भगवान गणेश की लाल रंग की प्रतिमा घर में स्थापित कर, उन्हें लाल व सिंदूरी के वस्त्र पहनाएं। पूजा में उन्हें गुड़ के लड्डू, छुआरा, अनार और लाल गुलाब के फूल चढ़ाएं।

मंत्र – ॐ ह्रीं उमापुत्राय नम:

धनु राशि – धनु राशि के जातक भगवान गणेश की पीले रंग की प्रतिमा घर में स्थापित कर, उन्हें पीले रंग के वस्त्र पहनाएं। पूजा में उन्हें पीले पुष्प, पीले रंग की मिठाई, मोदक और केले का भोग लगाएँ।

मंत्र – हरिद्रारूप हुं गं ग्लौं हरिद्रागणपतयै वरवरद दुष्ट जनहृदयं स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा॥

मकर राशि – इस राशि वाले जातकों को गणेश जी के नीले रंग की प्रतिमा को घर लाना चाहिए और उन्हें नीले रंग के वस्त्र पहनाना चाहिए। गजानन की पूजा में मावे से बने प्रसाद, किशमिश, सफेद फूल, तिल के लड्डू और चमेली के तेल में सिन्दूर मिलाकर चढ़ाएं।

मंत्र – ॐ लम्बोदराय नमः।

कुंभ राशि – कुम्भ राशि के जातक भगवान गणेश की नीले रंग की प्रतिमा घर में स्थापित कर, उन्हें नीले रंग के वस्त्र पहनाएं। पूजा में उन्हें मावे से बने प्रसाद, किशमिश, हरे फल, सफेद फूल, गुड़ के लड्डू और चमेली के तेल में सिन्दूर मिलाकर चढ़ाएं।

मंत्र – ॐ सर्वेश्वराय नमः।

मीन राशि – इस राशि वाले जातकों को गणेश जी के गहरे पीले रंग की प्रतिमा को घर लाना चाहिए और उन्हें पीले रंग के वस्त्र पहनाना चाहिए। गजानन की पूजा में पीले वस्त्र, पीले पुष्प, बादाम, पीले रंग की मिठाई, बेसन के लड्डू और केले का भोग लगाएँ।

मंत्र – ॐ सिद्धि विनायकाय नमः।

ज्योतिषाचार्य निधि राज त्रिपाठी के अनुसार—–गणेश स्थापना पूजन राहुकाल :

गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) शनिवार के दिन लग जाने की वजह से सुबह 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक राहु काल रहेगा। यह समय गणेश प्रतिमा स्थापना और पूजन करने के लिए अनुकूल नहीं है। इस समय खंड का त्याग करना शुभ फलदायी होगा।

गणेश चतुर्थी स्थापना पूजन शुभ मुहूर्त चौघड़िया

गणेश चतुर्थी का आरंभ 21 अगस्त की रात 11 बजकर 4 मिनट से।
गणेश चतुर्थी तिथि का समापन 22 अगस्त शाम 7 बजकर 58 मिनट।
शुभ चौघड़िया सुबह 7 बजकर 58 से 9 बजकर 30 तक।
लाभ चौघड़िया दोपहर 2 बजकर 17 मिनट से 3 बजकर 52 मिनट तक।
अमृत चौघड़िया शाम 3 बजकर 53 मिनट से 5 बजकर 17 मिनट तक।
शुभ लाभ और अमृत चौघड़िया के दौरान पूजन करना शास्त्रों के अनुसार लाभकारी रहेगा।

नोट : सुबह 9 बजे से राहुकाल आरंभ हो रहा है। जबकि शुभ चौघड़िया 9 बजकर 30 मिनट तक है। यानी राहुकाल के कुछ हिस्से में शुभ चौघड़िया रहेगी। ऐसे में अगर चाहें तो राहुकाल के दौरान इस काल खंड में भी गणपति स्थापना पूजन कार्य संपन्न कर सकते हैं।

सभी ज्योतिषीय समाधानों के लिए क्लिक करें: 9302409892

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