चुनावी गर्मी वादों से पेट नहीँ भरता साहब रोजगार चाहिए फिसलती जुबानें बिगड़ते बोल

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जबलपुर,सत्ता का सुख कौन नहीं चाहता चाहे वो तीन बार का हारा हुआ प्रत्यासी हो या लगातार तीन बार से विजय श्री हासिल करते हुए आ रहा हो लेकिन सबको अब फिर सत्ता का सुख चाहिए जिसके चलते पूरे देश में चुनावी रैलियों का शोर गुल सुनाई दे रहा आलम तो यह है की नेताओं की रात की नींद और दिन का चैन खो गया है इनके बस एक ही काम रह गए है जनता को कैसे रिझाये पर बाबू अब जनता अनपढ़ नहीं है अपना भला बुरा समझकर ही अपने मत का उपयोग करेगी लेकिन इन सबके बीच कहीँ न कहीं चुनाव जातिगत समीकरणों पर भी आधारित हो गए है तो वहीं एक अच्छी बात यह है की नई सोच के युवा अब विकाश के मुद्दे ,रोजगार ,शिक्षा जैसे अहम मुद्दों पर बहस करते नजर आ जाते है और वोट भी इन्ही मुद्दों पर देने की बात करते है जिस तरह से गर्मी अपने पूरे सबाब में है वैसे ही चुनावी गर्मी भी पूरी तरह गरमाई हुई है

मंहगाई की जनता पर मार

दिल्ली की गद्दी में चाहे कोई भी बैठे जनता को उनसे यही उम्मीद रहती है की महंगाई कम हो ,कानून व्यवस्था मजबूत हो ,युवाओं को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर मिल सके लेकिन क्या ये सरकारें युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोज पाई है या यूं ही लोगों को घर बैठे हर महीने पैसे देने का वादा कर सत्ता का सफर तय कर दिल्ली की गद्दी में बैठना चाहते है लोगों को अब लुभावने वादे नहीँ साहब काम चाहिए ताकि आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों का जीवन यापन अच्छे से हो सके इसके साथ ही देश में कानून व्यवस्था मजबूत हो लोगों को न्याय पाने भटकना न पड़े मंहगाई कम हो तो लोगों के लिए अच्छे दिन स्वाभाविक ही आ जायेंगे

अक्सर माननीय की जुबान क्यों फिसलती है

जिन नेताओं को आप मुखिया और सरकार बनाना चाहते हो उन माननीयों की जुबान तो ऐसे फिसलती है जैसे कोई बर्फ में फिसलता जाए उसमें भी विरोधी के लिए यदि अपशब्द कहे जाए और उनके समर्थक ताली बजाए तो क्या कहने ऐसे नेताओं के ताजा उदाहरण आजम खान का देखा जाए तो रामपुर की शाहबाद तहसील में आयोजित एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए आजम खान ने एक बार फिर भाषा की मर्यादा तोड़ते हुए विवादित बयान दे डाला। हैरान करने वाली बात यह थी कि इस दौरान मंच पर एसपी अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी मौजूद रहे। इससे पहले एसपी से सांसद रहीं और इस चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चुनावी मैदान में पहुंचीं या प्रदा ने आजम खान पर जलील करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनकी वजह से ही उन्हें रामपुर छोड़कर जाना पड़ा था। जया प्रदा ने कहा था, ‘आजम खान साहब, मैंने आपको भाई कहा लेकिन आपने मुझे बहन के नाम से बद्दुआ दी और जलील किया।जया प्रदा का नाम लिए बगैर आजम ने जनसभा में मौजूद लोगों से पूछा, ‘क्या राजनीति इतनी गिर जाएगी कि 10 साल जिसने रामपुर वालों का खून पिया, जिसे उंगली पकड़कर हम रामपुर में लेकर आए, उसने हमारे ऊपर क्या-क्या इल्जाम नहीं लगाए। क्या आप उसे वोट देंगे?’ आजम ने आगे कहा कि आपने 10 साल जिनसे अपना प्रतिनिधित्व कराया, उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लगे, मैं 17 दिन में पहचान गया कि इनके नीचे का अंडरवेअर खाकी रंग का है।