धर्ममध्य प्रदेश

चैत्र नवरात्रि:नवार्ण मंत्र का अनुष्ठान

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🌹चैत्री नवरात्र ( 25 मार्च से अप्रैल 2 )में नवार्ण मंत्र का अनुष्ठान🌹

🌹चैत्री शुक्लपक्ष प्रतिपदा से रामनवमी तक चैत्री नवरात्र मनायी जाती है । यह व्रत-उपवास व जप-ध्यान का पर्व है । आश्विन नवरात्र के समान फलदायी माना गया है । श्रीदेवी भागवत में आता है कि विद्या, धन व पुत्र के अभिलाषी को नवरात्रव्रत का अनुष्ठान करना चाहिए । जिसका राज्य छिन गया हो, ऐसे नरेश पुनः गद्दी पर बिठाने की क्षमता इस व्रत में है । श्रीरामजी राज्य से च्युत हो गये थे व सीताजी का वियोग हो गया था । उस समय नवरात्र का व्रत किया । व्रत के प्रभाव से महाबली रावण का वध किया तथा जनकनंदिनी सीताजी व निष्कंटक राज्य को पाया । यदि कोई पूरे नवरात्र के उपवास न कर सकता हो तो सप्तमी, अष्टमी और नवमी तीन दिन उपवास करने से वह नवरात्र के उपवास के फल को प्राप्त करता है ।

आसुरीशक्ति का विनाश और दैवीशक्ति का विकास हो जिससे इस हेतु सभी साधक नवरात्र में नवार्ण मंत्र का 11-11 माला अवश्य जप करें ।

🌹नवार्ण मंत्र – ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ।

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