जरा हटकेमध्य प्रदेश

जब अधिकारी मेहरवान तो खनन माफिया पहलवान 

जबलपुर :कमलनाथ सरकार के मंत्री व सरकार अवैध उत्खनन पर रोक लगाने के दावे करते नहीँ थक रहे तो वहीं जबलपुर के ग्रामीण अंचलों में अवैध उत्खनन व परिवहन जोरों पर है एक तरफ जहाँ रेत माफियों ने नदियों को खोखला कर दिया वहीँ कुछ खनन माफिया पहाड़ियों को खाई बनाकर अवैध रूप से मुरम का उत्खनन कर रहे आखिर क्यों न हो अवैध उत्खनन जब अधिकारी मेहरवान तो खनन माफिया पहलवान कुछ इस तरह की कहावत इस समय जबलपुर के ग्रामीण अंचलों में चरितार्थ हो रही है तो वहीँ मजेदार बात तो यह है की जिस खदान के अवैध उत्खनन को साहब ने वेध करार कर दिया उसकी शिकायत और खबर प्रकशित होते ही खनन माफियो ने वहाँ से मशीन व हाइवा हटा लिए अब वे यहाँ वहां से जुगाड़ फिट करने में लगे है की सेटिंग कैसे हो जाये तो फिर से अवैध उत्खनन सुरु कर सकें इसके लिए बाकायदा खबर प्रकाशित करने वालों के पास भी कुछ धमकी भरे अंदाज में फोन भी करवाये जा रहे है क्योंकि यहाँ मामला सैट नहीं हो पा रहा अब प्रभावशालियों से फोन करवाया जा रहा है की अवैध उत्खन्नन तो कहाँ नहीं हो रहे तुम इस तरफ ध्यान मत देना अब ऐसे में मीडिया की स्वतंत्रता भी छीनने का कुछ लोग प्रयास करें तो इसके क्या मायने निकाले जा सकते है जबकि एक तरफ मुख्यमंत्री कमलनाथ ने हाल ही में कहा था की पत्रकार बिना किसी के दबाब में आये निडर होकर सच को उजागर करें लेकिन यहाँ तो उल्टी ही गंगा बह रही है अब देखना होगा की जिन अधिकारियों के सरंक्षण में ये अवैध काम चलते उन पर सरकार क्या कार्यवही करेगी ?हम बात कर रहे है मंझोली तहसील की पोड़ा सर्किल अंतर्गत आने वाले तपा खुडावल की तो वहीँ कुछ ही दूरी पर लगे कंजई समीप ,व खिन्नी ,केथरा ,सहित मझगवां के कई ऐसे हिरन नदी के घाट होंगे जहाँ से रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन हो रहा है साथ ही ये किनके सरंक्षण में हो रहा है ये बात भी वरिष्ठ अधिकारियों को पता है लेकिन वे कब उन अधिकारियों ,कर्मचारियों को इन मामलों में जबाब तलब करेंगे ये तो वे ही जानें बरहाल अवैध उत्खनन की समस्याएं घटने की बजाय बढ़ती जा रहीं हैं

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