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जमीन को लेकर प्रसासन से जंग,जब छुड़ाना ही था तो क्यों दिया था पट्टा ?

जबलपुर कटनी (अवधेश यादव ):जिस जमीन के टुकड़े पर खेती किसानी करके ग्रामीण अपने बच्चों का पेट पाल रहे थे ,इतना ही नहीँ कई साल पहले प्रसासन ने इन ग्रामीणों को बकायदा पट्टा भी दिया था लेकिन आज वही जमीन प्रसासन उनसे छुड़ा रहा है, हलाकि प्रसासन की काफी लंबे अरसे से इस जमीन पर नजर थी,लेकिन जैसे ही वन विभाग द्वारा खेती वाली जमीन पर मुनारा गाड़ने की प्रक्रिया की जाने लगी तो ग्रामीण आक्रोशित हो गए,ग्रामीणों का आरोप है की उनकी बिना जानकारी के प्रसासन यह काम कर रहा है,

ये है पूरा मामला,

प्राप्त जानकारी के मुताबिक स्लीमनाबाद थाना अन्तर्गत ग्राम भितरीगढ में वन विभाग और और ग्रमीण आमने समाने दोनों के बीच झगड़ा अब तुल पकडता जा रहा हैआज पूरे तैयारी के साथ तहसीलदार विजय दुवेदी नायाब तहसीलदार
राजीव मिश्रा और स्लीमनाबाद थाना प्रभारी सी के तिवारी अपने दल बल के साथ भितरीगढ पहुंचे
जहाँ ग्रमीण जगंल में अपनी जमीन पर कार्य करते नजर आए ग्रमीणो का कहना है कि जो कार्य हम जिस जमीन पर कर रहे हैं वह जमीन हमारी है ओर उसका
पट्टा हमारे पास है,

वन विभाग को ट्रांसफर की जा चुकी है जमीन

बताया तो यह भी जा रहा है की यह जमीन का पट्टा सन 1989 का पट्टा है तहसीलदार विजय द्विवेदी ने बताया कि यह जमीन राजस्व विभाग द्वारा वन विभाग को ट्रांसफर कर दी थी सन 1962 में यह मगर यह जमीन के पट्टे इन किसानों के पास है जिनका नामांतरण के लिए आवेदन लग चुका है लेकिन वहां वन विभाग के मुनारा है इस जमीन को एसडीएम कोर्ट मैं यह मामला चल रहा है वन विभाग की जमीन पर ना तो हम नाप कर सकते हैं जब तक की यह पूरा केस फाइनल नहीं हो जाता हम वन विभाग के मुनारा के अंदर की जमीन नहीं नाप सकते ग्रामीणों का कहना है कि जो जमीन पर हम कार्य कर रहे हैं और सफाई कर रहे हैं अगर वह जमीन जब भी वन विभाग की निकलती है तो हम देने को तैयार हैं मगर जब तक यह जमीन का फाइनल नहीं हो जाती हमें इस पर कृषि का कार्य करने दिया जाए नहीं तो हमारे बच्चे रोड पर आ जाएंगे हमारा मुख्य कार्य खेती ही है और हम खेती पर ही आश्रित हैं तहसीलदार के मना करने पर भी ग्रामीण नहीं माने और अपना कार्य सुचारू रूप से चालू रखा वन विभाग के रेंजर ढीमरखेड़ा आर के शुक्ला आर आई श्रीवास्तव जी पटवारी पुलिस विभाग तहसीलदार नायब तहसीलदार अपने अपने दल बल के साथ ग्रामीणों को मनाने पहुंचे प्रोग्राम ग्रामीण नहीं माने

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