खास खबरमध्य प्रदेश

टिड्डी दल के संभावित हमले व प्रकोप,से बचाव हेतु सावधान व सतर्क रहें किसान

जबलपुर :भारत सरकार माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार पड़ोसी राज्य राजस्थान के रास्ते
टिड्डी दल प्रदेश के होशंगाबाद, नीमच, उज्जैन, देवास, पन्ना, छतरपुर, सतना, रायसेन, दमोह,
सागर, रीवा के बाद नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, सिवनी जिले में प्रवेश की संभावना है।
संयुक्त संचालक कृषि श्री नेताम ने बताया कि संभाग के प्रत्येक जिले में टिड्डी दल के
प्रवेश करने की संभावना को ध्यान में रखते हुए एवं टिड्डी दल प्रकोप नियंत्रण के लिए
आवश्यक सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान, बचाव एवं प्रभावी उपाय करने हेतु प्रत्येक जिले में
त्रिस्तरीय कम्युनिकेशन दल के माध्यम से आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
इसके साथ ही किसान भाइयों को सूचित किया जाता है कि टिड्डी दल द्वारा खेतों में
लगी ग्रीष्मकालीन फसलों को भारी मात्रा में नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त ये
फलों और सब्जियों की नर्सरियों को भी चट कर रहे है। किसान भाइयों ये टिड्डी दल हवा की
दिशा में अपने सामने आने वाली हर हरी चीज, फसलों के साथ ही वनस्पति या पेड़-पौधे को भी
भारी मात्रा में नुकसान पहुंचा रहे हैं। ये टिड्डी दल लाखों की संख्या में समूह में रात्रि के समय
खेतों में रूककर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं एवं जमीन लगभग 500 से 1500 अंडे प्रति
मादा कीट देकर सुबह उड़कर दूसरे स्थान पर चले जाते हैं।
किसान भाइयों को टिड्डी दल के हमले अथवा प्रकोप से फसलों के बचाव एवं सतर्कता
हेतु त्रिस्तरीय कम्युनिकेशन दल के माध्यम से सतत् प्रचार-प्रसार तथा कृषकों को खेतों में सतत्
निगरानी रखने की सलाह दी गई है ताकि हमले की संभावना को देखते हुए बचाव एवं उपाय व
दवाओं का प्रयोग कर फसलों को नुकसान से बचाया जा सके। कृषकों को टिड्डी दल के
आक्रमण के बचाने अथवा नियंत्रण हेतु सामयिक उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है।
संयुक्त संचालक कृषि ने बताया कि किसान भाई टोली बनाकर परम्परागत उपाय जैसे
ढोल बजाकर, डीजे बजाकर, थाली, टीन के डिब्बे से शोर मचाकर, ट्रेक्टर का साइलेंसर
निकालकर चलाएं तथा अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से तेज आवाज कर टिड्डी दल
को भगाएं।प्रकाश प्रंपच लगाकर, खेतों में कल्टीवेटर या रोटावेटर चलाकर टिड्डी कीट तथा उनके
अंडों को नष्ट करें। जहां टिड्डियों ने अण्डे दिए हैं उन स्थानों को खोदकर या पानी भरकर या
जुताई कर अण्डों को शीघ्रता से नष्ट करें।

यदि शाम के समय टिड्डी दल का प्रकोप होता है तो प्रात: 4 बजे से सूर्योदय तक निम्न
अनुशंसित कीटनाशी दवाएं ट्रेक्टर चलित स्प्रे पम्प (पावर स्प्रेयर) द्वारा जैसे क्लोरपायरीफास 20
ईसी 200 मिली या डेल्टामेथिन 2.8 ईसी 600 मिली अथवा लम्डासायलोथ्रिन 5 ईसी 400
मिली या डाईफ्लूबिनज्यूरॉन 25 डब्ल्यूटी 240 ग्राम प्रति हेक्टेयर 600 लीटर पानी में मिलाकर
छिड़काव करें। यदि टिड्डी दल के आक्रमण हो जाने के बाद कीटनाशी दवा उपलब्ध न होने की
दशा में ट्रेक्टर चलित (पावर स्प्रेयर) के द्वारा तेज बौछार से भी टिड्डी को भगाया जा सकता
है। जैसे ही टिड्डी दल के आक्रमण एवं पहचान की सूचना मिलती है तो प्रत्येक जिला स्तर पर
स्थापित कंट्रोल रूम को त्वरित गति से अनिवार्यत: सूचित करें।

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