मध्य प्रदेशसंपादकीय

त्यौहारों पर पड़ता कोरोना का असर,अब वापिस जाना चाहते है प्रवासी मजदूर

कोरोना ने ऐसा कोहराम मचाया की बड़े -बड़े पर्व त्यौहारों की रंगत फीकी पड़ गई है, एक तरफ़ जहाँ रोज कोरोना के बढ़ते आंकड़े लोगों को डरा रहे है तो वहीं अब लोगों की जीवनशैली भी दिनोदिन बदलती जा रही है, ऐसे में भविष्य का भारत कैसा होगा?क्या वैक्सीन जब तक आएगी तब तक पूरी दुनिया की रंगत ही बदल जाएगी,माना की रूस ने वैक्सीन बना ली लेकिन अभी तक उसके फायदे पूरी दुनिया के सामने नहीँ आये,

त्यौहारों में कोरोना का असर

कोरोना ने ऐसा कोहराम मचाया की रक्षा बंधन जैसे पवित्र पर्व में कई बहनों ने भाई की कलाई में राखियां नहीं बांध सकी कुछ वाहनों के बन्द होने की बजह से नहीं पहुँची तो कुछ बहनों की अलग मजबूरी थी लेकिन ये सब कोरोना का ही कोहराम है,की चाहे बकरीद हो या रक्षाबंधन ,जन्माष्टमी या अन्य पर्व सब की रंगत और लोगों के उत्साह पर कोरोना का ग्रहण सा लग गया है,

अब वापिसी करना चाहते है प्रवासी

सरकार ने कहा प्रवासी कस्ट में जरूर आये है लेकिन हम इनकी हर तरह की मदद करेंगे लेकिन इस लॉलीपॉप को मजदूर चूसते -चूसते थक गए,अब जब उन्हें सरकारी वादा झूठा लगा और योग्यता मुताबिक न काम मिला तो कुछ पढ़े लिखे मजदूरों ने मिट्टी भी खोदी क्या करें पापी पेट का सवाल था लेकिन अब तो उनके पास कोई रोजगार नहीं बचा पैसा धेला भी खत्म हो चला तो अब ऐसे में प्रवासी मजदूर जान जोखिम में डालकर रिटर्न टिकट लेने का मन बना रहे है,

घटते रोजगार के अवसर

कोरोना ने कई फैक्ट्रियों सहित कई कम्पनियों की कमर तोड़कर रख दी है, प्रिंट मीडिया भी इसमें शामिल है, इनमें कार्यरत हजारों कर्मचारियों को निकाल दिया गया अब उनके सामने रोजी रोटी का संकट आन पड़ा है ,ऐसे में अब ये पढ़े लिखे लोग बेरोजगार हो चुके है, ऐसे में ये क्या करें इनके लिए सरकार की क्या पॉलसी है?कुछ भी स्पस्ट नहीं हो पा रहा है,

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