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थैलीसीमिया समाज मुक्त बनाने जनजागरूकता पैदा करना जरूरी—श्री घनघोरिया

थैलीसीमिया पर आयोजित कार्यशाला में शामिल हुए सामाजिक न्याय मंत्री

जबलपुर,प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण मंत्री लखन घनघोरिया ने थैलीसीमिया जैसे रोगों के निवारण के लिए व्यापक स्तर पर जनजागरूकता पैदा करने की जरूरत पर जोर दिया है । श्री घनघोरिया आज रविवार को मदन महल रेल्वे स्टेशन के समीप स्व. श्रीमती गुरूशरण कौर नारंग की स्मृति में थैलीसीमिया की बीमारी व रक्तदान जन जागरूकता को लेकर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित कर रहे थे ।
सामाजिक न्याय मंत्री ने अपने संबोधन में थैलीसीमिया मुक्त समाज बनाने के लिए अपनी ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि इस रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए कार्यशाला में दिये गये सुझावों को अमल में लाने शासन स्तर पर भी प्रयास करेंगे । श्री घनघोरिया ने इस मौके पर थैलीसीमिया मुक्त समाज बनाने का संकल्प भी उपस्थित जनों को दिलाया । कार्यशाला में थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों व समाजसेवियों ने सामाजिक न्याय मंत्री श्री घनघोरिया को थैलीसीमिया मुक्त समाज बनाने के लिए अपनाये जाने वाले उपायों को लेकर एक पत्र भी सौंपा ।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली से आए डॉ वीपी चौधरी, डॉ शरद जैन, डॉ संजय मिश्रा, डॉ सुनित लोकवानी, डॉ क्षीतिज भटनागर, डॉ सोनल रिछारिया, डॉ नीतू यादव, डॉ रविन्द्र छाबड़ा, थैलीसीमिया की मरीज झरना मलिक आदि के द्वारा थैलीसीमिया की बीमारी व रक्तदान को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई। इस मौके पर विशेषज्ञों ने बताया कि थैलीसीमिया की बीमारी को जड़ से समाप्त करने का एक ही रास्ता है । इसके लिए शादी व संतान की प्लानिंग करने वाले दम्पतियों की अनिवार्य रूप से थैलीसीमिया की जांच करवाई जाए, उसके बाद ही शादी व संतान की प्लानिंग की जाए। वहीं रक्तदान को लेकर विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि रक्तदान एक ऐसा पवित्र कार्य है, जिससे किसी पीड़ित का जीवन बचता है और रक्तदान करने वाला व्यक्ति हमेशा स्वस्थ्य रहता है, उसे किसी भी प्रकार की कोई गंभीर बीमारी होने की संभावनायें कम हो जाती है ।
कार्यशाला के दौरान अतिथि के तौर पर सीएमएचओ डॉ मनीष मिश्रा, डॉ सुनील बहल निर्मल परिहार आदि मौजूद रहे। इस मौके पर स्वच्छता अभियान की ब्राण्ड एम्बेसडर रहीं और बाल कालाकार सुश्री श्रेया खण्डेलवाल ने भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के उपरांत सभी चिकित्सक, अतिथियों व समाजसेवियों का सम्मान भी किया गया। राष्ट्रीय कार्यशाला दिशा वेलफेयर सोसायटी, थैलीसीमिया जन जागरण समिति, रोटरी जबलपुर वेस्ट, इडियन मेडिकल एसोसिएशन, वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे एम्पलाईज यूनियन, जबलपुर केमिस्ट एण्ड ड्रगिस्ट एसोसिएशन व शहर की समस्त समाजसेवी संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। कार्यक्रम के शुरू होने के पूर्व दिवंगत समाजसेवी व थैलीसीमिया की बीमारी से मृत व्यक्तियों को श्रद्धासुमन अर्पित किये गये ।
थैलीसीमिया की बीमारी अनुवांशिक बीमारी है:
कार्यशाला में बताया गया कि थैलीसीमिया एक अनुवांशिक बीमारी है, इस बीमारी से पीडि़तों को हर 10 दिन से 15 दिन में रक्त चढ़ाना अति आवश्यक होता है, अगर रक्त नहीं चढ़ाया जाता है तो अत्यंत तकलीफ होती है और कई बार ऐसी भी स्थिति निर्मित हो जाती है कि पीडि़तों की हालत नाजुक हो जाती है। कार्यशाला में बताया गया कि देशभर में थैलीसीमिया की बीमारी से पीडि़तों की संख्या कई हजार के आसपास है, वहीं जबलपुर संभाग में थैलीसीमिया की गंभीर बीमारी से पीडि़तों की संख्या 500 के पार है। इस बीमारी की जानकारी समाज के हर वर्ग को हो सके, इसके लिए राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

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