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बिहार में चुनाव की तारीखों का एलान

 

नई दिल्ली:बिहार में चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है,चुनाव आयोग ने शुक्रवार को बिहार विधानसभा चुनाव के तारीखों का ऐलान कर दिया। लेकिन अभी भी दोनों प्रमुख गठबंधनों से कौन जाएगा और किसकी नई एंट्री होगी, इसे लेकर अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं। सूबे में 28 अक्टूबर को पहले चरण की वोटिंग है लेकिन सत्ताधारी एनडीए की प्रमुख सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी कौन सी राह पकड़ेगी इसे लेकर सस्पेंस बना हुआ है। एलजेपी ने संकेत दिया है कि वह 143 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जिनमें वे सीटें भी शामिल होंगी जहां से एनडीए की सहयोगी जेडीयू चुनाव लड़ेगी। हालांकि, एलजेपी बीजेपी उम्मीदवारों का सपोर्ट करेगी। सीटों पर भी जहां बीजेपी या जेडीयू के उम्मीदवार मैदान में होंगे। सूबे में 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को तीन चरणों में चुनाव होंगे। 10 नवंबर को नतीजे घोषित होंगे।ऐसा नहीं है कि सिर्फ एनडीए में ही अंदरूनी घमासान है। विपक्षी महागठबंधन की स्थिति तो और भी खराब दिख रही है। ऐसा लग रहा है कि महागठबंधन सिर्फ नाम का रहेगा, असल में आरजेडी और कांग्रेस के गठबंधन के रूप में सिमट जाएगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की अगुआई वाली आरएलएसपी और विकासशील इंसान पार्टी तो महागठबंधन छोड़ने की कगार पर हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांजी पहले ही महागठबंधन का दामन छोड़कर जेडीयू मुखिया और बिहार के सीएम नीतीश कुमार से हाथ मिला चुके हैं।उपेंद्र कुशवाहा भी आरजेडी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। पार्टी सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि कुशवाहा कभी भी महागठबंधन से अलग होने का ऐलान कर सकते हैं,आरएलएसपी नेता माधव आनंद ने गुरुवार को कहा था, ‘हमने महागठबंधन को बनाए रखने के लिए हर मुमकिन चीज की लेकिन आरजेडी का हठी रवैये से हम त्रस्त आ चुके हैं। हम जिन सिद्धांतों को लेकर चले हैं उसके प्रति हमेशा प्रतिबद्ध बने रहेंगे। लेकिन अब हमें तथाकथित महागठबंधन से कोई खास उम्मीद नहीं बची है जिससे पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की HAM पहले ही अलग होकर एनडीए में जा चुकी है।’

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