जरा हटकेमध्य प्रदेश

धर्म की जगह किसने कर दिया अधर्म:भृस्टाचार की भेंट चढ़ गया था मंझोली के कटाव धाम में बना यह पुल,नदी में टूटकर पड़े हुए है इसके पुर्जे -पुर्जे,क्यों नहीं हुई इसकी जांच?

जबलपुर :मझौली तहसील के कटाव धाम में मंदिर जाने के लिए नदी के ऊपर बनाया गया पुल एक साल भी नहीँ टिक सका था ,घटना के बाद कुछ समाजसेवियों द्वारा लाखों के पुल के एक साल के अंदर टूट जाने पर सवाल उठाते हुए इसकी जांच की मांग की गई थी लेकिन इसकी न आज तक जांच हुई न ही जिम्मेदारों ने इस टूटे हुए पुल के पुर्जे ही नदी से उठाए,सूत्रों की मानें तो इस पुल निर्माण की एजेंशी ग्राम पंचायत रानीताल थी,और यह 13 लाख 98 हजार की लागत से बनाया गया था,यह पुल बनने के महज एक साल के अंदर टूट गया था ,इसके टूटने के बाद भी अधिकारियों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा इस पुल की जांच तक नहीं करवाई गई ,अब ऐसे में सवाल उठता है की इतना बड़ा हादसा हुआ और इसकी जांच तक क्यों नहीँ हुई ?

ठगे से महसूस कर रहे स्थानीय लोग,

मामला जबलपुर जिले की जनपद पंचायत मंझोली की ग्राम पंचायत रानीताल अंतर्गत कटाव धाम का है जहां पर धार्मिक स्थल पर जाने के लिए पुल निर्माण के भूमीपूजन का कार्य २१.११.२०१७ में पूर्व विधायक नीलेश अवस्थी द्वारा कराया गया था, लेकिन यह पुल पहली बरसात में ही बह गया था, प्राकृतिक आपदा के कारण वह पुल बह गया पुल निर्माण इतनी मजबूती से हुआ कि साल भर भी नहीं चल पाया,अचरज की बात तो यह है की आजतक इस पुल के एक साल अंदर टूटने की जाँच तक नहीँ हुई ,जिससे स्थानीय लोग व मंदिर में जाने वाले श्रद्धालू अपने आपको ठगे से महसूस कर रहे है,

अभी भी नदी में पड़े है पुल के पुर्जे,

वहीं देखने वाली बात यह है कि आज भी वह पुल घटनास्थल पर पड़ा हुआ है शासन की राशि का दुरुपयोग किस प्रकार होता है यह  विकास कार्यों को दर्शाता है ,ना किसी प्रकार की कोई जांच हुई ,ना कोई अधिकारी देखने गया , ना ही उसे घटनास्थल से  उठाया गया ,पुनः निर्माण कार्य  कराने मैं ध्यान भी नहीं दिया गया ,  धार्मिक स्थान श्रद्धालुओं के लिए अनोखा उपहार  धार्मिक स्थल कटाव धाम
शिवालय लाल मंदिर पहुंचने के लिए ग्रामीण वासी नगर वासी को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है,साथ ही पुल बनने के बाद इतने जल्दी टूट गया लेकिन इसकी न तो जांच की गई न ही दोषियों पर कार्यवाही की गई ,

धर्म की जगह किसने कर दिया अधर्म,

वहीँ धर्म क्षेत्र व लोगों को मंदिर जाने के लिए नदी के ऊपर बने इस पुल के टूटने से कई सवाल खड़े होते है की आखिर लाखों की लागत से बना यह पुल एक ही बरसात में टूटकर नदी में कैसे गिर गया इस घटना के बाद पुल टूटने की जांच क्यों नहीँ करवाई गई ?धर्म की जगह पर किसने अधर्म किया ये तमाम तरह के सवाल आज स्थानीय लोगों के दिलोदिमाक में बने हुए है,

इनका कहना है,

वहीं इस मामले में सस्पेंड चल रहे सचिव सुनील दाहिया का कहना है की सेम्प्लेक्स कंपनी द्वारा यह पुल बनाया गया था जिसकी निर्माण एजेंशी ग्राम पंचायत रानीताल थी,

इनका कहना है,

रानीताल ग्राम पंचायत निर्माण एजेंशी थी ,पुल 13लाख 98 हजार की लागत से किसी निजी कंपनी द्वारा बनाया गया था ,

भोजराज झारिया प्राभारी सहसचिव

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