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मझौली के सायलोज केंद्र में उपार्जन व्यवस्था संभाल रहीं महिलाएं


जबलपुर :गले तक घूंघट करके झाडू-बुहारी और घर का चूल्हा-चौका करने वाली परंपरा की बेड़ियाँ तोड़कर आदि शक्ति आजीविका मिशन संकुल स्तरीय महिला संगठन ग्राम इन्द्राना की महिला सदस्यों ने गेहूं उपार्जन जैसे पुरूषों के एकाधिकार वाले क्षेत्र में अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज कर महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिख दी है ।  कलेक्टर भरत यादव ने जिस विश्वास और भरोसे से संगठन की महिलाओं को गेहूं खरीदी का दायित्व सौंपा था, उसमें अब तक तो वे भरोसे पर खरा ही उतरी हैं ।यह प्रदेश का संभवत: पहला महिला स्व-सहायता समूहों का संकुल स्तरीय संगठन है जो गेहूं उपार्जन के क्षेत्र में भी हाथ आजमाकर अपना लोहा मनवाने जा रहा है । उल्लेखनीय है कि इस संगठन की सभी सदस्य महिलायें हैं, जो स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन गतिविधियों से जुड़ी हैं ।

कलेक्टर भरत यादव ने मध्यप्रदेश दीनदयाल अंत्योदय योजना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित महिला समूहों के आदि शक्ति आजीविका संकुल स्तरीय संगठन इंद्राना को समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन हेतु विकासखण्ड मझौली में बनाये गए सायलोज केन्द्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत अभाना के ग्राम तागबहार के 105 किसानों के गेहूं खरीदी का दायित्व सौंपा है ।  आदि शक्ति आजीविका संगठन की महिला पदाधिकारी और सदस्य गेहूं खरीदी की जिम्मेदारी को बखूबी निभा भी रही हैं ।  इस संगठन द्वारा अब तक 13 किसानों से सात लाख 80 हजार रूपये मूल्य का 405 क्विंटल गेहूं खरीदी की जा चुकी है । महिलाओं ने आजीविका संवर्धन की अन्य गतिविधियों के साथ-साथ अब गेहूं खरीदी जैसे मुश्किल समझे जाने वाले पुरूष प्रधान क्षेत्र में भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा दी है और सिद्ध कर दिया कि दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं जो महिलायें ना कर सकें ।कलेक्टर भरत यादव कहते हैं कि हमने यह सोचकर इन्हें गेहूं उपार्जन का दायित्व सौंपा था कि ग्रामीण परिवेश में इस प्रकार का बदलाव महिलाओं के जीवन में एक नया सवेरा लेकर आयेगा । उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि महिलायें अब पुरूषों के कंधे से कंधा मिलाकर नहीं, बल्कि उनसे कई कदम आगे रहकर व्यवस्थायें सम्हाल रही हैं ।आदि शक्ति आजीविका संकुल स्तरीय संगठन की अध्यक्ष गायत्री ठाकुर कहती है कि गेहूं खरीदी की जिम्मेदारी देकर कलेक्टर सर ने जो हम लोगों पर भरोसा दिखाया है हम उस पर खरे उतर कर दिखायेंगे । वे कहती हैं कि इस संकुल स्तरीय संगठन में 13 ग्राम पंचायतों के 20 गांवों में बने 120 समूहों के कुल 1440 सदस्य हैं ।  हमारे पास इस प्रकार की जिम्मेदारी सम्हालने के लिए समूह के सदस्यों के रूप में पर्याप्त मानव संसाधन मौजूद हैं । संगठन की सचिव ज्योति श्रीपाल ने बताया कि उनके संगठन को 105 किसानों के गेहूं उपार्जन का कार्य मिला है, हमारे संगठन के पास बड़ी संख्या में सदस्य हैं, इसलिए हम लोग और अधिक बड़ी जिम्मेदारी चाहते हैं ।  वहीं संगठन की दुर्गा चौधरी ने कहा कि हमारे संगठन को 4-5 और समितियों की खरीदी की जिम्मेदारी मिलती तो उसे भी वे लोग निभा लेतीं ।
आदि शक्ति महिला आजीविका संगठन की महिलायें काफी उद्यमी और आत्मनिर्भर हैं ।  कोरोना संकट के दौर में इन लोगों ने मास्क निर्माण का कार्य भी शुरू कर दिया है वे अब तक 1500 मास्क नि:शुल्क वितरित कर चुकी हैं । ग्राम पंचायतों को 8 रूपये प्रति मास्क की दर पर 7 हजार 800 मास्क बेच चुकी हैं ।  अब मास्क की बढ़ी डिमांड और गुणवत्ता के चलते इन्हें 10 रूपये प्रति मास्क की दर पर मनरेगा के श्रमिकों के लिए 11 हजार मास्क निर्माण का आर्डर मिला है ।  संगठन की महिला सदस्य आजीविका वाशिंग पावडर बनाती हैं, जो 40 रूपये प्रति किलो की दर पर बेचा जाता है ।  इसके अलावा पिसी हल्दी, धनिया, मिर्च, मसाला भी आजीविका ब्रांड के नाम से बाजार में बिक्री हेतु उपलब्ध है ।
 विदित हो कि 13 सेवा सहकारी समितियों को मिलाकर समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए बनाये गए मझौली सायलोज केन्द्र में 20 अप्रैल तक 217 किसानों से 14 हजार 522 क्विंटल से अधिक गेहूं खरीदा जा चुका है ।

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