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महात्मा गांधी के 150 वें जन्मदिवस पर आज होंगे विविध कार्यक्रम शहीद स्मारक में मुख्य आयोजन

संगोष्ठी, गांधी के प्रिय भजन और नाटक का होगा मंचन
दांड़ी यात्रा निकलेगी

जबलपुर :2 अक्टूबर 2019 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का 150 वां जन्मदिवस मनाएगा । जबलपुर जिले में राज्य शासन द्वारा राष्ट्रपिता की स्मृति को और उनकी मध्यप्रदेश की यात्रा को स्मरणीय बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। 2 अक्टूबर की प्रात: से ही शुरू होने वाले विविध कार्यक्रमों के बाद शाम 6 बजे से मुख्य समारोह शहीद स्मारक गोलबाजार में आयोजित होगा। महात्मा गांधी द्वारा नमक सत्याग्रह के लिए की गई दांड़ी यात्रा का स्मरण करते हुए प्रतीक स्वरूप दोपहर 3 बजे से शासकीय जिला चिकित्सालय (विक्टोरिया) के समीप स्थित गांधी भवन से दांड़ी यात्रा निकाली जाएगी, जो कि शहीद स्मारक गोलबाजार में आकर समाप्त होगी। इस यात्रा में शालेय छात्र-छात्राएं और नागरिक शामिल होंगे।
मुख्य समारोह में महात्मा गांधी के विचार, दर्शन, कार्यों और शिक्षाओं पर आधारित संगोष्ठी होगी। जिसमें जस्टिस एमव्ही तामस्कर और दर्शनशास्त्र की प्रोफेसर डॉ गायत्री सिन्हा का उद्बोधन होगा। शोविज इवेन्ट समूह द्वारा गांधी भजन और गीत गायन की प्रस्तुति होगी। विवेचना रंग मंडल द्वारा महात्मा गांधी पर आधारित नाटक का मंचन किया जाएगा। महात्मा गांधी के सिद्धांत, कार्यों और प्रेरणा तथा विकास पर आधारित प्रदर्शनी भी शहीद स्मारक प्रांगण में लगाई गई है।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 20 मार्च 1921 को पहली बार जबलपुर पहुंचे। वे यहां श्याम सुंदर भार्गव की खजांची चौक स्थित कोठी में रूके। गांधी जी ने कांग्रेस के आदर्शों के प्रति जनता में रूचि जागृत करने के अभियान में हिस्सा लिया। उनके साथ उनकी यूरोपियन शिष्या मीराबेन भी थीं। जो पहले मिस स्लेड थीं। दूसरे व्यक्ति ठक्कर बापा थे। महात्मा गांधी ने स्त्रियों की सभा में महिलाओं से तिलक स्वराज फण्ड के लिए धन के साथ जेवर भी दान में प्राप्त किए। गांधी जी की सार्वजनिक सभा गोलबाजार मैदान जहां आज शहीद स्मारक भवन स्थित है, में हुई थी।
महात्मा गांधी ने दो दिसम्बर 1933 को सिहोरा में आमसभा को संबोधित किया था। गांधी जी तीन दिसम्बर को जबलपुर आए और व्यवहार राजेन्द्र सिंह के साठिया कुआं निवास में ठहरे। उस समय वे अनुसूचित जाति की समस्या के निराकरण के लिए आए थे। उनके साथ महादेव देसाई, महाराजा कुमार विजया नगरम् और कनु गांधी भी थे। गोलबाजार मैदान में आयोजित सभा में महात्मा गांधी ने अपने उद्बोधन में कहा था कि ” मेरा विश्वास इस आंदोलन पर बढ़ता ही जाता है। अस्पृश्यता, असमानता का सबसे बुरा पहलू है।” 6 दिसम्बर 1933 को गुजराती क्लब में गुजराती समाज की ओर से गांधी जी का स्वागत किया गया। 7 दिसम्बर 1933 को हितकारिणी हाई स्कूल में महिलाओं की सभा में धन संग्रह किया। इसके बाद सदर बाजार में दो मंदिर अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के लिए खोले गए।
महात्मा गांधी 27 फरवरी 1941 को इलाहाबाद में कमला नेहरू अस्पताल का उद्घाटन करने जाते हुए कुछ समय के लिए जबलपुर भी रूके। गांधी जी मीरगंज स्टेशन पर उतरे और वहां से भेड़ाघाट गए। उन्होंने अपने साथियों के साथ नाव में बैठकर बंदरकूदनी देखा। प्रकृति के इस अनुपम और बहुरंगी सौंदर्य को देखकर गांधी जी अभिभूत हो गए थे। उनके साथ महादेव भाई देसाई, कनु देसाई और महाराजा कुमार विजयानगरम् भी थे। महात्मा गांधी के भोजन और विश्राम की व्यवस्था हीरजी गोविंद जी के रत्नहीर नामक भवन में की गई थी।
27 अप्रैल 1942 को गांधी जी मदन महल स्टेशन पर उतर कर पंडित द्वारिका प्रसाद मिश्र के निवास पर अल्पप्रवास पर रहे। गांधी जी सेठ गोंविददास जी को देखने विक्टोरिया अस्पताल भी गए।

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