जरा हटकेमध्य प्रदेश

मैडल तमगों से बस पेट नहीं भरता साहब:प्रदेश का नाम रोशन करने वाली जानकी को भूल गई सरकार

पीएम आवास तक नहीँ मिला खपरैल घर में रहती है विक्रम पुरस्कार प्राप्त जानकी

जबलपुर( सिहोरा ):एक तरफ तो सरकार दिव्यांगों की हर तरह से मदद करने की बातें करती है,लेकिन इस दिव्यांग के परिवार को पक्की छत तक नसीब नहीँ हुई,हम बात कर रहे है, उस अंतरराष्ट्रीय जूडो खिलाड़ी दिव्यांग जानकी की जिसने अपनी मेहनत और परिश्रम के साथ थोड़ी बहुत प्रशासन व समाजसेवियों की मदद से विक्रम पुरस्कार तो हासिल कर लिया लेकिन उसको न तो पक्की छत नसीब हुई न ही अब उसे कोई सरकारी मदद मिल रही है जिससे की वह अपनी प्रैक्टिस जारी रख सके इतना ही नहीँ जानकी की जीविका का एकमात्र सहारा उसको मिलने वाली 600 पेंशन है,अब ऐसे में वह अपनी जीविका चलाये की प्रैक्टिस करे,

मैडल तमगों से पेट नहीं भरता साहब

हम बात कर रहे जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील के ग्राम कुरो में रहने वाली अंतरराष्ट्रीय जूडो खिलाड़ी दिव्यांग जानकी बाई गौड की जिसका कहना है की मेडल तगमें से सम्मान तो मिलता है किंतु पेट की भूख नहीं मिटती साहब ,

नहीं मिला पीएम आवास

600 रुपये पेंशन के सहारे जानकी का जीवन

गौरतलब है की प्रतिभा की धनी दिव्यांग जानकी ने देश विदेश में स्वर्ण कास्य रजत पदक जीतकर प्रदेश की झोली में डालने मे तो कोई कसर नहीं छोड़ी मगर प्रदेश सरकार ने आज तक विक्रम अवार्ड प्राप्त खिलाड़ी की कोई सुध भी नहीं ली मात्र दिव्यांग पेंशन के सहारे जीवन यापन कर रही अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी ₹600 प्रति माह में उदर पोषण करें या अपनी प्रतिभा को निखारे।


मजदूर परिवार में जन्मी


सिहोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कुर्रो निवासी मजदूर राम गरीब सिंह पुनिया बाई के यहां जन्म लेने वाली जानकी बाई के दो भाई एवं एक बहन है भाई रघुवीर एवं वीरभद्र का विवाह हो चुका है एवं दोनों लोग दिहाड़ी मजदूरी पर जाते हैं वही बहन गांव में ही काम मिलने पर मजदूरी कर लेती है पिता बकरी चरा कर बमुश्किल परिवार के उधर पोषण का इंतजाम कर पाते हैं।


अभाव में पनपती प्रतिभा


आर्थिक अभाव में गुजर-बसर कर रहे परिवार के लिए तरुण संस्कार समाजसेवी संस्था की साइट सेवर योजना से जानकी की विकास यात्रा का शुभारंभ हुआ संस्था द्वारा महिलाओं का समूह बनाकर अगरबत्ती बनाने का कार्य प्रारंभ किया गया वहीं दिव्यांग जानकी की प्रतिभा को परखते हुए उसे जूडो की ट्रेनिंग दिलाई गई और अभाव में पनपती प्रतिभा ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया।


मेडलो की लग गई झड़ी


तरुण संस्कार संस्था के माध्यम से जानकी ने पहली बार लखनऊ में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता 2014 में हिस्सा लिया गुड़गांव में 2015 में आयोजित प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता उजवेकिस्तान के लिए चयनित हुई जहां कास्य मेडल जीत कर देश की झोली में डालकर जूडो की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बन गई। इसके बाद 2017 में जकार्ता एवं 2018 में तुर्की में अपना परचम फहराने वाली अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी आज अपने परिवार सहित उदर पोषण के लिए सरकार की नजरें इनायत हो इसका इंतजार कर रही है। ज्ञात हो कि लगातार तीन वर्षों से विदेश में देश का नाम रोशन करने वाली जानकी की तत्कालीन कलेक्टर महेश चंद्र चौधरी .समाजसेवी विनय असाटी एवं तरुण संस्कार संस्था द्वारा समय-समय पर मदद मुहैया कराई जाती रही।अनेक जनप्रतिनिधियों ने भी उसे केवल कोरा आश्वासन देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली


सरकार से आस

आर्थिक अभाव के चलते अनेक प्रतिभा उजागर होने के पहले ही दम तोड़ देती हैं ऐसे में सरकार को अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए आर्थिक मदद के साथ रोजगार उपलब्ध कराते हुए जानकी को उसके इरादों पर खरा उतरने आगे आना चाहिए।

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