खास खबरमध्य प्रदेश

श्रीडालीबाबा रामलीला समाज: कलाकारों का अनुभव ही रामलीला की शान, फिल्मी गानों का रहता है निषेध

(यदुवंशी ननकू यादव )

सतना:श्रीडालीबाबा आश्रम में पहली रामलीला 1911 में हुई थी। आश्रम के पांचवें पीठाधीश्वर बद्रीदासजी ने शुरुआत कराई थी। 108 साल पुरानी इस रामलीला का मंचन कई साल तक आश्रम परिसर में कराया जाता रहा। बाद में दर्शकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आश्रम के बाहर मैदान में मंचन किया जाने लगा। यहां ज्यादातर पेशेवर व पुराने कलाकार हैं। लंबे समय तक यहां की रामलीला ठेके पर कराई जाती थी। यानी आश्रम द्वारा किसी एक मंडली को मंचन की जिम्मेदारी सौंप दी जाती थी।
आश्रम के महंत पीयूषदासजी ने बताया कि आज भी हमारी रामलीला में फिल्मी गानों का निषेध है। मानस की चौपाई-दोहे, कवित्त व सवैया से रोचकता लाने का प्रयास किया जाता है। सभी कलाकार पुराने हैं। इनमें से ज्यादातर तो 30-40 वर्ष से लगातार मंचन कर रहे हैं। इनका अनुभव ही रामलीला की खासियत है। शाम 6 बजे मीटिंग में तय होता है कि किसको कौन सा रोल निभाना है।
*सभी कलाकार स्थानीय*
श्रीडालीबाबा रामलीला समाज में इस वर्ष 20 से ज्यादा कलाकार हैं। ज्यादातर आसपास के गांवों से ही हैं और वर्षों से रामलीला में सहभागी बन रहे हैं। कुछ तो कलाकार ऐसे भी हैं, जिनके पिता या ताऊ भी मंचन कर चुके हैं। एक समय था, जब रामलीला देखने के लिए यहां दूर-दूर गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग आते थे। समय के साथ रामलीला की ख्याति बढ़ी और गांव-गांव में इसका मंचन होने लगा। इसके बाद गांव से आने वाले लोग तो कम हो गए, लेकिन दर्शकों की संख्या में कमी नहीं आई। आज भी रामलीला शुरू होने के पहले दर्शक पहुंच जाते हैं।
*तय नहीं होता शेड्यूल*
डालीबाबा रामलीला की खासियत यह भी है कि यहां रामलीला मंचन का शेड्यूल तय नहीं होता। एक दिन में जहां तक की रामलीला हो जाएगी, उसके आगे दूसरे दिन मंचन किया जाएगा। महंत पियूषदास जी ने बताते हैं कि शेड्यूल निर्धारित कैसे कर सकते हैं। मान लीजिए कल बारिश हो रही थी, जिस कारण दर्शक चले गए। जो रामलीला होनी थी, नहीं हो पाई। लिहाजा, आज उसका मंचन किया जाएगा।

घर-परिवार से कोई रामलीला से नहीं जुड़ा था। अचानक मन में आया कि मैं भी रामलीला करूं। महंत जी ने आग्रह भी मान लिया। 40 साल से लगातार भाग ले रहा हूं। लक्ष्मण के रोल से रामलीला शुरू की थी।
*राम स्वयंबर गौतम, डालीबाबा रामलीला*

बिरसिंहपुर नगर परिषद में नौकरी मिल गई थी। रामलीला के लिए छुट्टी मांगी, नहीं मिली तो रिजाइन दे दी। 42 साल से डालीबाबा रामलीला से जुड़ा हूं। तुलसी स्मारक में भी मंचन करने का मौका मिला।
*रामलाल तिवारी, डालीबाबा रामलीला समाज*

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close
Close