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संत को आज चौपड़ा परिसर में दी गई समाधि,हत्यारे अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर

जबलपुर :दस दिन से लापता चौपड़ा में रहने वाले संत के शव की जानकारी 13 मई को लगी तो उनके परिजनों ,संत समाज सहित उनके भक्तों को गहरा आघात लगा,साथ ही 14 मई की सुबह पुलिस व एफएसएल की टीम द्वारा शव को नाले से निकालकर पंचनामा कार्यवाही करते हुए,पीएम के लिए भेज दिया गया था चूंकि शव काफी पुराना व पूरी तरह डिकम्पोज होने के कारण सिहोरा में पीएम नहीं हो सका,और डॉक्टरों द्वारा शव को जबलपुर भिजवाया गया ,जिसे पुलिस ने आज प्रियजनों को सौप दिया ,वहीँ साधू भरत शरण महराज उर्फ(भैया लाल )को आज चौपड़ा मन्दिर परिसर में ही उनके परिजनों भक्तों व संत समाज की उपस्थिति में समाधी दी गई,लेकिन संत की हत्या करने वाले हत्यारे अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है,

ये है पूरा मामला ,

खितौला थाना क्षेत्र अंतर्गत जंगल के बीचोबीच चौपड़ा सिद्धधाम में रहने वाले साधू भरत शरण महराज उर्फ( भैया लाल यादव )उम्र 85 वर्ष का शव जंगल के अंदर नाले के अंदर मिट्टी में दबे मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई,30 मई को परिजनों से उनकी बात हुई थी उसके बाद विगत 10 दिनों से लापता थे जिनका शव बुधवार के दिन जंगल में उनके भक्तों द्वारा खोजबीन के दौरान  मिला ,महराज विगत दस वर्षों से खितौला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सरदा के जंगल के बीच स्तिथ सिद्धधाम चौपड़ा में रहकर भगवान की भक्ति कर रहे थे ,गौरतलब है की चौपड़ा सैकड़ो वर्ष प्राचीन सिद्ध स्थान है ,जहाँ पर इन्होंने जन सहयोग से पांच वर्ष पूर्व मन्दिर का निर्माण कार्य करवाया था, महतज मूलतः कटनी जिले की बहोरीबंद तहसील के खाड़ पटी के रहने वाले थे, जिन्होंने पत्नी का स्वर्गवास होते ही सन्यास ले लिया था ,इनकी तीन बेटियां है जिनकी शादी हो चुकी है ,

किसने की हत्या,कब पकड़े जाएंगे हत्यारे

वहीं घटना की जानकारी लगते ही पूरे क्षेत्र में गम का माहौल निर्मित हो गया,और लोगों में तरह -तरह की चर्चायें चलने लगीं की आखिर साधु भरत शरण महराज उर्फ भैया लाल की हत्या किसने की और क्यों ,क्योंकि जिस तरह से चोपड़ा मंदिर से लगभग 200 मीटर की दूरी में जंगल के अंदर वन विभाग की टंच लाइन के अंदर (नाले)में मिट्टी से शव को दबा दिया गया था जिससे कुछ ही दूरी पर कटे हुए बाल कंठी माला व एक रस्सी डली हुई पाई गई ,इस तरह की तमाम चर्चायें क्षेत्रवासियों व उनके भक्तों के बीच चल रहीं है ,हलाकि इस बात का खुलासा तो पुलिस अभी तक नहीँ कर पाई है ,न ही पुलिस के हाथ हत्यारों की गर्दन तक पहुँचे है,

30 अप्रैल को करवाया था इलाज

वहीँ परिजनों ने बताया की महराज ने 30 अप्रैल को अपना इलाज हर्राखेरा गाँव मे जाकर करवाया था उसके बाद से महराज गुमशुदा हो गए थे,जब भक्त व परिजनों ने उन्हें फोन पर सम्पर्क किया तो तीन चार दिन फोन नहीँ लगा उसके बाद परिजनों व महराज के ग्रामीण भक्तों द्वारा जंगल मे खोजबीन सुरु कर दी गई , इसी दौरान नाले में एक व्यक्ति का पैर जहाँ पर शव को दबाया गया था पड़ गया ,तब जाकर लोगों ने वहाँ पर गौर किया तो पास में कंठी माला व थोड़ी दूर पर रस्सी पड़ी मिली साथ ही शव के पास लंगोट मिला जिससे लोगों को जानकारी लग सकी की ये महराज का शव है जिसकी सूचना परिजनों द्वारा पुलिस को दी गई सूचना मिलते ही पहुँची पुलिस ने मामले की जांच सुरु कर दी है ,

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