जरा हटकेमध्य प्रदेश

सरकार की शराब ठेकेदारों से यारी क्यों?,इनके लिए कोई नियम कानून नहीं है क्या?

 

 

जबलपुर:वैसे तो सबके लिए नियम कानून एक सामान रहते है लेकिन टोटल लॉक डाउन में सभी दुकानों को बन्द करके सिर्फ शराब दुकानें ही खोलना कहां तक उचित है ?या ये समझा जाये की शराब नहीँ तो सरकार की अर्थव्यवस्था नहीं यदि कोई आदमी टोटल लॉक डाउन के दिन जरूरी काम से भी निकला है तो पुलिस वाले उसकी बीच रास्ते मे ही क्लास लगा देते है ,लेकिन शराब के लिए नहीँ वैसे तो कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा शहर में एक दिन का टोटल लॉक डाउन किया जाता है, जिसमें शराब दुकान को छोड़कर सभी दुकानों पर ताले डलवा दिए जाते है, इसी विषय को लेकर शिवसेना प्रदेश प्रवक्ता पंडित कन्हैया तिवारी का आरोप है की शिवराज सरकार द्वारा  पुनः रविवार लॉकडाउन के दिन *आवश्यक वस्तुओं की दुकानों को बंद रखने का आदेश तो दिया गया परंतु शराब दुकान खोलने की आदेश की पुनरावृत्ति की गई* इससे यह सीधा समझ में आता है इस वक्त *शिवराज सरकार शराब ठेकेदारों के गिरफ्त में है उन्हें गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवार की जनता से ज्यादा शराब ठेकेदारों के राजस्व की चिंता है*

 

बिजली बिल में धोखा,

 

कन्हैया तिवारी ने आरोप लगाते हुए यह भी कहा की एक तरफ जहां बिजली बिल माफ करने में उन्होंने आम गरीब जनता को धोखा दिया है, संबल योजना गरीबी रेखा कार्ड के नाम पर ना जाने कितनों को हजारों रुपए का अनाप-शनाप बिजली बिल भेजा गया और *मध्यम वर्गीय परिवार की तो ऐसी अनदेखी की गई जैसे वह मध्यप्रदेश में निवासी नहीं करता और उनके वोटों की आवश्यकता उन्हें पड़ेगी ही नहीं या उन्हें पहले मध्यम वर्गीय परिवार ने वोट ही नहीं दिया* और *स्कूल फीस की ओर भी प्रदेश सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया* उनका एकमात्र ध्यान *शराब ठेकेदारों को राजस्व कमाना और गरीब जनता को मरने के लिए छोड़ देना उद्देश्य समझ में आता है* शिवसेना इसका घोर विरोध करती है और *शिवसेना प्रदेश प्रमुख ठाड़ेश्वर महावरजी के आदेश पर पूरे प्रदेश में इस आदेश के विरुद्ध उग्र आंदोलन किए जाने की चेतावनी देती है.

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