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सिहोरा के आमाडोंगरी स्कूल पहुँचे एसडीएम ने थमाया नोटिस

जबलपुर( सिहोरा ) :आमाडोंगरी स्कूल में मिट्टी तेल से सना खाना खाकर बीमार हुए बच्चों की ख़बर लेने पहुँचे सिहोरा एसडीम गौरव वेनल व जनपद सी ई ओ याजुवेंद्र कोरी ने पूरे स्कूल व मध्यान्ह भोजन का निरक्षण करते हुए एसडीएम गौरव वेनल ने संकुल प्राचार्य अशोक उपाध्याय ,स्वसहायता समूह व स्कूल प्रबंधन को नोटिश थमाते हुए जल्द से जल्द पूरे मामले में जबाब मांगा है आपको बता दें की मझगवां में मध्यान्ह भोजन का खाना खाकर स्कूली बच्चों की गत दिवस बुधवार की दोपहर तबियत खराब हो गई थी जिन्हें ग्राम सरपंच विनोद पटेल की मदद से मझगवां के प्राथमिक स्वास्थ केंद्र जहाँ पर बच्चों के इलाज के लिए मना कर दिया लेकिन किसी तरह दबाब में आकर वहाँ पर स्तिथ डॉक्टर व नर्षो ने बच्चों का ईलाज किया था तब जाकर बच्चों की तबियत सही हो सकी थी

ये है मामला ,

बुधवार के दिन सिहोरा संकुल के प्राथमिक शाला आमाडोंगरी स्कूल में बच्चों को परोसे गए मध्यान्ह भोजन में मिट्टी तेल मिला होने से बच्चों की भोजन करने के बाद तबियत खराब हो गई सभी बच्चे उल्टियां करने लगे जानकारी लगते ही भारी संख्या में ग्रामीण स्कूल पहुँच गए और ग्राम सरपंच विनोद पटेल को सूचना दी जिसके बाद बच्चों को सरपंच की मदद से शासकीय अस्पताल मझगवां ले जाकर सभी बच्चों का इलाज करवाया गया तब कहीँ जाकर बच्चों की तबियत में सुधार हो सका

इन बच्चों की हो गई तबियत खराब

वहीं मध्यान्ह भोजन दीप्ति स्वसहायता समूह द्वारा बनाया जाता है जिसका खाना खाकर 7 बच्चों की तबियत खराब हो गई खराब खाना खाकर तबियत खराब होने वाले बच्चों में दीपका काछी पिता सुनील ,आदित्य ,शिवा काछी, अंजली काछी ,प्रियांशी काछी ,प्रिंस ,चंदन काछी बीमार हो गए वहीं बताया जा रहा है की इस विद्यालय में मध्यान्ह भोजन बनाने वाले स्वसहायता समूह द्वारा बच्चों को अच्छा खाना नहीँ दिया जाता और आज तो हद कर दी गई जब बच्चों को मिट्टी तेल मिला खाना खिला दिया गया

अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा समय खत्म हो गया नहीँ हो पायेगा इलाज

वहीं ग्राम सरपंच विनोद पटेल ने बताया की मध्यान्ह भोजन का खराब खाना खाकर बीमार हुए बच्चों को जब इलाज के लिए मझगवां के सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए तो वहाँ डॉक्टरों ने पहले तो यह कहते हुए इलाज करने से मना कर दिया कि अस्पताल का समय खत्म हो गया है अब इलाज नहीँ कर सकेंगे लेकिन बाद में लोगों के दबाब आकर इलाज किया अब ऐसे में आप सोच सकते है की अभी भी ग्रामीण अंचलों में कितनी खराब है स्वास्थ्य व्यवस्थाएं

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