जरा हटकेमध्य प्रदेश

सिहोरा में यूरिया को लेकर त्राहिमाम घँटों लाइन में लगने के बाद भी किसानों को नहीं मिल रही खाद

मनमर्जी से खुलती है दुकान,जिम्मेदार खामोश

जबलपुर ;एक तरफ तो सरकार किसानों की हमदर्द बनकर उनके सारे दुखदर्द दूर करने की बाते और वायदे करते नहीं थकती लेकिन जबलपुर जिले के सिहोरा में यूरिया को को लेकर किसान बेहद परेसान है, क्योंकि खेत मे फसल खाद मांग रही है लेकिन किसानों को समय से खाद ही नहीं मिल पा रही है,नोबत तो यहाँ तक आ गई है की यूरिया खाद को लेकर किसान त्राहिमाम पुकार रहे है, सुबह से घँटों लाइन में लगने के बाद भी किसानों को उल्टे पैर खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है, जिसकी बजह है,जिम्मेदारों की लापरवाही और लेटलतीफी कहने को तो सिहोरा के गौरी तिराहा में स्तिथ मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विप.संघ की दुकान सुबह दस से सवा दस बजे तो खुल जाती है लेकिन ऐसा नहीँ हो रहा है, हकीकत कुछ और ही है,दुकान संचालक द्वारा मनमर्जी से दुकान खोली जाती है, आज सुबह से ही यूरिया के आस लिए दुकान के बाहर इंतजार कर रहे किसानों ने बताया की दुकान संचालक द्वारा साढ़े ग्यारह बजे दुकान को खोला गया,उसके बाद लगभग सैकड़ो किसानों के आधार कार्ड यह कहते हुए वापिस कर दिए गए की जिनको पर्ची मिल गई सिर्फ यूरिया उनको ही मिलेगी ,बाकी किसानों को 4 से 5 दिनों बाद ही यूरिया खाद दी जाएगी अब ऐसे में जिन किसानों के कार्ड गुरुवार के दिन जमा करवा कर आज खाद देने को कहकर सुबह से बुला लिया गया था उन्हें वापस कर दिया गया,जिससे किसानों में भारी आक्रोश है,

यूरिया खाद मिलने के इंतजार में बैठे किसान

यूरिया को लेकर भटक रहे किसान

किसान राकेश यादव सहित अन्य किसानों ने बताया यह समस्या लगभग एक सप्ताह से है लेकिन विगत दो दिनों से किसानों को यूरिया के नाम से परेसान किया जा रहा है,किसानों को सुबह बुलाकर उनके आधार कार्ड जमाकर उन्हें टोकन जरूर थमाए गए लेकिन यूरिया खाद नहीं दी गई,

एक एकड़ में दे रहे एक बोरी ,किसान के परिजनों को किया जा रहा परेसान

किसानों ने यह भी बताया की नियम के मुताबिक पर एकड़ में दो बोरी यूरिया किसानों को मिलनी चाहिए लेकिन वितरण करने वाले एक एकड़ में सिर्फ एक बोरी यूरिया ही दे रहे है, इतना ही नहीँ यदि कोई बीमार किसान के परिजन खाद लेने जाते है तो उन्हें यह कहते हुए की अपने पिता को ही भेजो जिसके नाम पर जमीन है भले ही वह बीमार हो इस बात से इन्हें कोई लेना देना कुल मिलाकर जिस अन्नदाता की वोट पर सरकार बनती बिगड़ती है उन किसानों को यूरिया के नाम से रुलाया जा रहा है,

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