मध्य प्रदेशसंपादकीय

सड़क पर गाय पलंग में कुत्ता,गाय हमारी माता है….

गाय माता जिसमें सभी देव समाये हुए है, जिस गाय माता की पूजा और उसका महत्व भगवान श्रीकृष्ण ने बताया था,आज गाय माता सड़कों में हादसों का शिकार हो रही है, पन्नी खाने मजबूर है क्योंकि अब उसे हरि घास नसीब नहीँ होती जंगल कम होते जा रहे है,चरोखर की भूमि अब आवासीय प्लाट में तब्दील हो गई तो कहा चारा खाने जाए गाय माता? इतना ही नहीँ आज आदमी इतना स्वार्थी हो गया है की गाय माता के दूध से मतलब है उसे बाकी गाय सड़क में खड़ी हो या हादसों का शिकार उसे कोई लेना देना नहीँ ,लेकिन पालतू कुत्तों को जरुर पलंग नसीब हो रहा है, कुछ लोग तो कुत्तों को पलंग ही नहीँ पलकों में बैठाकर रखते है, उनको भीआईपी सोफों में बैठाकर शान समझने वाले लोग गाय माता के महत्त्व को क्या जानें?

गांव में अभी भी गाय माता को महत्त्व देते है लोग

अब यदि आज के परिवेश की बात करें तो गांव में लोग आज भी गाय को महत्त्व देते है, यदि वह घर देर से आती है तो चिंता करने लगते है, इतना ही नहीँ घास चरने के बाद यदि समय पर गाय घर न आये तो ग्रामीण गाय की खोज में भी जंगल मे भी चले जाते है, लेकिन शहर में कुछ उल्टा ही कुछ गिने चुने लोगों को छोड़कर अब गाय माता की किसीको को चिंता नहीँ रहती अब चाहे गाय सड़क में खड़ी रहे या आवारा घूमे कोई लेना देना नहीं होता हां उनका डॉगी कुत्ता मोहल्ले में निकल जाए और उसे देर हो जाये तो पूरा घर परेसान हो जाता है,

गाय का महत्व

तो वहीँ गाय माता के महत्व की बात करें तो गाय का दूध ही नहीँ मूत्र, गोबर भी मनुष्य के लिए वरदान है, पुराणों में आता है गाय के शरीर मे सभी देवी देवताओं का निवास स्थान है, यदि मनुष्य गाय माता की श्रद्धा पूर्वक सेवा व पूजन करें तो उसके सभी मनोरथ पूरे हो जाते है ,वैसे तो लोग पूजा पाठ करके धन पाने की इक्छा रखते है, लेकिन भाग्य बदलने वाली तो गाय माता है,गाय के दूध से जीवन मिलता है, साथ ही रोज पञ्चगव्य का सेवन करने वालों को तो जहर तक का असर नहीँ होता और वह व्यक्ति सभी व्याधियों से मुक्त रहता है,गाय के दूध में वे सभी तत्व मौजूद है जो जीवन के लिए जरूरी है, हलाकि इस बात को वैज्ञानिक भी मानते है,लेकिन आज दुर्भाग्य की बात है की गाय माता सड़क पर है और कुत्ते पलंग में एसी कार में घूमते है,

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close
Close